*प्रेस नोट*
*नई दिल्ली, 29 अप्रैल 2026, बुधवार*
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*विषय: ईरान के हालात पर बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल का उद्बोधन – होटल क्राउन प्लाजा, रोहिणी, दिल्ली*
*डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच* के *राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल जी* ने आज होटल क्राउन प्लाजा, रोहिणी में एक वार्ता के दौरान *ईरान के वर्तमान संकट* पर चिंता व्यक्त की।
*बाबूजी के उद्बोधन के मुख्य बिंदु:*
*1. मानवीय संकट:*
_"ईरान आज 50 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी, पानी की कमी और घंटों बिजली कटौती झेल रहा है। गांव से शहरों की ओर पलायन हो रहा है। खेती सूख रही है, भोजन-पानी का संकट है। यह किसी भी देश की जनता के लिए असहनीय स्थिति है।"_
*2. अंतरराष्ट्रीय दबाव:*
_"ईरान पर पहले से कड़े प्रतिबंध लगे हैं। इस महीने के अंत में जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन E3 द्वारा और प्रतिबंध की आशंका है। ऐसे में आम ईरानी नागरिक का जीवन और कठिन हो रहा है।"_
*3. सरकार की नीति पर प्रश्न:*
_"रिपोर्ट्स के अनुसार जून के संघर्ष के दौरान 21,000 से अधिक गिरफ्तारियां, 1,000+ चेकपोस्ट, 7+ फांसी और 200 लोगों पर विदेशी जासूसी के आरोप लगे।_
_जब देश में पानी-बिजली-बुनियादी ढांचे का संकट है, तब भी प्राथमिकता हथियार खरीद और बाहरी संघर्ष को दी जा रही है। अपने ही नागरिकों पर सख्ती बढ़ रही है। यह नीति सरकार की कमजोरी दर्शाती है, ताकत नहीं।"_
*4. इजरायल का संदेश:*
_"इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने ईरानी जनता को संबोधित कर कहा – 'आप हमारे दुश्मन नहीं हैं'। इजरायल ने पानी-खेती की तकनीक ऑनलाइन साझा करने की बात कही है। इजरायल ने रेगिस्तान में खेती कर दुनिया को रास्ता दिखाया है।"_
*बाबूजी का निष्कर्ष:*
_"ईरान एक प्राचीन सभ्यता है, फारस की संस्कृति महान है। लेकिन आज ईरान कठिन दौर में है।_
_डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कहते थे – 'राष्ट्र का पहला धर्म अपनी जनता का कल्याण है'। कोई भी सरकार बंदूक से नहीं, रोटी-पानी-सम्मान से चलती है।_
_ईरान सरकार के पास दो रास्ते हैं:_
*1. टकराव का रास्ता:* हथियार, परमाणु जिद, जनता पर दमन – इसका अंत अलगाव और बर्बादी है।
*2. संवाद का रास्ता:* परमाणु महत्वाकांक्षा छोड़ो, प्रतिबंध हटवाओ, जनता के लिए पानी-बिजली-रोजगार लाओ – इसका अंत समृद्धि है।_
_भारत 'वसुधैव कुटुंबकम्' में विश्वास करता है। हम ईरानी जनता के सुख-दुख में साथ हैं। हमारी कामना है कि ईरान सरकार हिंसा छोड़कर बातचीत चुने, ताकि फारस की धरती पर फिर से अमन और खुशहाली लौटे।"_
*जय हिंद | विश्व शांति*
*– प्रचार विभाग*
*डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राष्ट्रीय विचार मंच, नई दिल्ली*
*राष्ट्रीय अध्यक्ष: बाबूजी सुशील कुमार सरावगी जिंदल*
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